मनुष्य अपने कुटुम्बका पेट पालनेमें जो अन्याय करता है, उसका दैवविहित कुफल वह नरकमें जाकर भोगता है। उस समय वह ऐसा व्याकुल होता है, मानो उसका सर्वस्व लुट गया हो॥ ३२॥
दैवेनासादितं तस्य शमलं निरये पुमान्।
भुङ्क्ते कुटुम्बपोषस्य हृतवित्त इवातुरः॥ ३२
मनुष्य अपने कुटुम्बका पेट पालनेमें जो अन्याय करता है, उसका दैवविहित कुफल वह नरकमें जाकर भोगता है। उस समय वह ऐसा व्याकुल होता है, मानो उसका सर्वस्व लुट गया हो॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.30.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 388) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/30/32/