श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.30.28

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

यास्तामिस्रान्धतामिस्रा रौरवाद्याश्‍च यातनाः।

भुङ्क्ते नरो वा नारी वा मिथः संगेन निर्मिताः॥ २८

yāstāmisrāndhatāmisrā rauravādyāśca yātanāḥ|

bhuṅkte naro vā nārī vā mithaḥ saṃgena nirmitāḥ|| 28

अर्थ

ये सब यातनाएँ तथा इसी प्रकार तामिस्र, अन्धतामिस्र एवं रौरव आदि नरकोंकी और भी अनेकों यन्त्रणाएँ, स्त्री हो या पुरुष, उस जीवको पारस्परिक संसर्गसे होनेवाले पापके कारण भोगनी ही पड़ती हैं॥ २८॥

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