श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.3.6

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

सुतं मृधे खं वपुषा ग्रसन्तं

दृष्ट्वा सुनाभोन्मथितं धरित्र्या।

आमन्त्रितस्तत्तनयाय शेषं

दत्त्वा तदन्तःपुरमाविवेश॥ ६

sutaṃ mṛdhe khaṃ vapuṣā grasantaṃ

dṛṣṭvā sunābhonmathitaṃ dharitryā|

āmantritastattanayāya śeṣaṃ

dattvā tadantaḥpuramāviveśa|| 6

अर्थ

अपने विशाल डीलडौलसे आकाशको भी ढक देनेवाले अपने पुत्र भौमासुरको भगवान्‌के हाथसे मरा हुआ देखकर पृथ्वीने जब उनसे प्रार्थना की, तब उन्होंने भौमासुरके पुत्र भगदत्तको उसका बचा हुआ राज्य देकर उसके अन्तःपुरमें प्रवेश किया॥ ६॥✎ 200

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #200 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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