sa vai drauṇyastrasaṃchinnaḥ punarbhagavatā dhṛtaḥ|| 17
अर्थ
उत्तराके उदरमें जो अभिमन्युने पूरुवंशका बीज स्थापित किया था, वह भी अश्वत्थामाके ब्रह्मास्त्रसे नष्ट-सा हो चुका था; किन्तु भगवान्ने उसे बचा लिया॥ १७॥✎ 203204205
उत्तरायां धृतः पूरोर्वंशः साध्वभिमन्युना।
स वै द्रौण्यस्त्रसंछिन्नः पुनर्भगवता धृतः॥ १७
उत्तराके उदरमें जो अभिमन्युने पूरुवंशका बीज स्थापित किया था, वह भी अश्वत्थामाके ब्रह्मास्त्रसे नष्ट-सा हो चुका था; किन्तु भगवान्ने उसे बचा लिया॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.3.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 247) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/3/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#203 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने