श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.29.25

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

अर्चादावर्चयेत्तावदीश्‍वरं मां स्वकर्मकृत्।

यावन्‍न वेद स्वहृदि सर्वभूतेष्ववस्थितम्॥ २५

arcādāvarcayettāvadīśvaraṃ māṃ svakarmakṛt|

yāvanna veda svahṛdi sarvabhūteṣvavasthitam|| 25

अर्थ

मनुष्य अपने धर्मका अनुष्ठान करता हुआ तबतक मुझ ईश्‍वरकी प्रतिमा आदिमें पूजा करता रहे, जबतक उसे अपने हृदयमें एवं सम्पूर्ण प्राणियोंमें स्थित परमात्माका अनुभव न हो जाय॥ २५॥

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