॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.28.24
ऊरू सुपर्णभुजयोरधिशोभमाना-
वोजोनिधी अतसिकाकुसुमावभासौ।
व्यालम्बिपीतवरवाससि वर्तमान-
कांचीकलापपरिरम्भि नितम्बबिम्बम्॥ २४
ūrū suparṇabhujayoradhiśobhamānā-
vojonidhī atasikākusumāvabhāsau|
vyālambipītavaravāsasi vartamāna-
kāṃcīkalāpaparirambhi nitambabimbam|| 24
अर्थ
भगवान्की जाँघोंका ध्यान करे, जो अलसीके फूलके समान नीलवर्ण और बलकी निधि हैं तथा गरुडजीकी पीठपर शोभायमान हैं। भगवान्के नितम्बबिम्बका ध्यान करे, जो एड़ीतक लटके हुए पीताम्बरसे ढका हुआ है और उस पीताम्बरके ऊपर पहनी हुई सुवर्णमयी करधनीकी लड़ियोंको आलिंगन कर रहा है॥ २४॥✎ 328