श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.26.53

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

हिरण्मयादण्डकोशादुत्थाय सलिलेशयात्।

तमाविश्य महादेवो बहुधा निर्बिभेद खम्॥ ५३

hiraṇmayādaṇḍakośādutthāya salileśayāt|

tamāviśya mahādevo bahudhā nirbibheda kham|| 53

अर्थ

कारणमय जलमें स्थित उस तेजोमय अण्डसे उठकर उस विराट् पुरुषने पुनः उसमें प्रवेश किया और फिर उसमें कई प्रकारके छिद्र किये॥ ५३॥

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