उपर्युक्त तीन प्रकारके अहंकारमेंसे वैकारिक अहंकारके विकृत होनेपर उससे मन हुआ, जिसके संकल्प-विकल्पोंसे कामनाओंकी उत्पत्ति होती है॥ २७॥✎ 319320
वैकारिकाद्विकुर्वाणान्मनस्तत्त्वमजायत।
यत्सङ्कल्पविकल्पाभ्यां वर्तते कामसम्भवः॥ २७
उपर्युक्त तीन प्रकारके अहंकारमेंसे वैकारिक अहंकारके विकृत होनेपर उससे मन हुआ, जिसके संकल्प-विकल्पोंसे कामनाओंकी उत्पत्ति होती है॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.26.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 364) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/26/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)