श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.26.12

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

महाभूतानि पंचैव भूरापोऽग्‍निर्मरुन्‍नभः।

तन्मात्राणि च तावन्ति गन्धादीनि मतानि मे॥ १२

mahābhūtāni paṃcaiva bhūrāpo'gnirmarunnabhaḥ|

tanmātrāṇi ca tāvanti gandhādīni matāni me|| 12

अर्थ

पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश—ये पाँच महाभूत हैं; गन्ध, रस, रूप, स्पर्श और शब्द—ये पाँच तन्मात्र माने गये हैं॥ १२॥✎ 318

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #318 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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