॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.26.10
श्रीभगवानुवाच
यत्तत्त्रिगुणमव्यक्तं नित्यं सदसदात्मकम्।
प्रधानं प्रकृतिं प्राहुरविशेषं विशेषवत्॥ १०
yattattriguṇamavyaktaṃ nityaṃ sadasadātmakam|
pradhānaṃ prakṛtiṃ prāhuraviśeṣaṃ viśeṣavat|| 10
अर्थ
श्रीभगवान्ने कहा—जो त्रिगुणात्मक, अव्यक्त, नित्य और कार्य-कारणरूप है तथा स्वयं निर्विशेष होकर भी सम्पूर्ण विशेष धर्मोंका आश्रय है, उस प्रधान नामक तत्त्वको ही प्रकृति कहते हैं॥ १०॥✎ 318