एक दिन तत्त्वसमूहके पारदर्शी भगवान् कपिल कर्मकलापसे विरत हो आसनपर विराजमान थे। उस समय ब्रह्माजीके वचनोंका स्मरण करके देवहूतिने उनसे कहा॥ ६॥
तमासीनमकर्माणं तत्त्वमार्गाग्रदर्शनम्।
स्वसुतं देवहूत्याह धातुः संस्मरती वचः॥ ६
एक दिन तत्त्वसमूहके पारदर्शी भगवान् कपिल कर्मकलापसे विरत हो आसनपर विराजमान थे। उस समय ब्रह्माजीके वचनोंका स्मरण करके देवहूतिने उनसे कहा॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.25.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 357) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/25/6/