साध्वि! सब अंगोंसे सम्पन्न उस योगका मैंने पहले नारदादि ऋषियोंके सामने, उनकी सुननेकी इच्छा होनेपर, वर्णन किया था। वही अब मैं आपको सुनाता हूँ॥ १४॥
तमिमं ते प्रवक्ष्यामि यमवोचं पुरानघे।
ऋषीणां श्रोतुकामानां योगं सर्वांगनैपुणम्॥ १४
साध्वि! सब अंगोंसे सम्पन्न उस योगका मैंने पहले नारदादि ऋषियोंके सामने, उनकी सुननेकी इच्छा होनेपर, वर्णन किया था। वही अब मैं आपको सुनाता हूँ॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.25.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 358) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/25/14/