इसी समय सरस्वती नदीसे घिरे हुए कर्दमजीके उस आश्रममें मरीचि आदि मुनियोंके सहित श्रीब्रह्माजी आये॥ ९॥
तत्कर्दमाश्रमपदं सरस्वत्या परिश्रितम्।
स्वयम्भूः साकमृषिभिर्मरीच्यादिभिरभ्ययात्॥ ९
इसी समय सरस्वती नदीसे घिरे हुए कर्दमजीके उस आश्रममें मरीचि आदि मुनियोंके सहित श्रीब्रह्माजी आये॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 353) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/24/9/