श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.46

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

आत्मानं सर्वभूतेषु भगवन्तमवस्थितम्।

अपश्यत्सर्वभूतानि भगवत्यपि चात्मनि॥ ४६

ātmānaṃ sarvabhūteṣu bhagavantamavasthitam|

apaśyatsarvabhūtāni bhagavatyapi cātmani|| 46

अर्थ

सम्पूर्ण भूतोंमें अपने आत्मा श्रीभगवान्‌को और सम्पूर्ण भूतोंको आत्मस्वरूप श्रीहरिमें स्थित देखने लगे॥ ४६॥✎ 312

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #312 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् को → श्रीभगवान्‌को

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