श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.4

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

स त्वयाऽऽराधितः शुक्लो वितन्वन्मामकं यशः।

छेत्ता ते हृदयग्रन्थिमौदर्यो ब्रह्मभावनः॥ ४

sa tvayā''rādhitaḥ śuklo vitanvanmāmakaṃ yaśaḥ|

chettā te hṛdayagranthimaudaryo brahmabhāvanaḥ|| 4

अर्थ

इस प्रकार आराधना करनेपर श्रीहरि तुम्हारे गर्भसे अवतीर्ण होकर मेरा यश बढ़ावेंगे और ब्रह्मज्ञानका उपदेश करके तुम्हारे हृदयकी अहंकारमयी ग्रन्थिका छेदन करेंगे॥ ४॥

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