आप वास्तवमें अपने भक्तोंका मान बढ़ानेवाले हैं। आपने अपने वचनोंको सत्य करने और सांख्ययोगका उपदेश करनेके लिये ही मेरे यहाँ अवतार लिया है॥ ३०॥
स्वीयं वाक्यमृतं कर्तुमवतीर्णोऽसि मे गृहे।
चिकीर्षुर्भगवान् ज्ञानं भक्तानां मानवर्धनः॥ ३०
आप वास्तवमें अपने भक्तोंका मान बढ़ानेवाले हैं। आपने अपने वचनोंको सत्य करने और सांख्ययोगका उपदेश करनेके लिये ही मेरे यहाँ अवतार लिया है॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 355) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/24/30/