सरोवरमें गोता लगानेपर उसने उसके भीतर एक महलमें एक हजार कन्याएँ देखीं। वे सभी किशोर-अवस्थाकी थीं और उनके शरीरोंसे कमलकी-सी गन्ध आती थी॥ २६॥
सान्तःसरसि वेश्मस्थाः शतानि दश कन्यकाः।
सर्वाः किशोरवयसो ददर्शोत्पलगन्धयः॥ २६
सरोवरमें गोता लगानेपर उसने उसके भीतर एक महलमें एक हजार कन्याएँ देखीं। वे सभी किशोर-अवस्थाकी थीं और उनके शरीरोंसे कमलकी-सी गन्ध आती थी॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.23.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 348) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/23/26/