श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.23.19

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

चक्षुष्मत्पद्मरागाग्र्यैर्वज्रभित्तिषु निर्मितैः।

जुष्टं विचित्रवैतानैर्महार्हैर्हेमतोरणैः॥ १९

cakṣuṣmatpadmarāgāgryairvajrabhittiṣu nirmitaiḥ|

juṣṭaṃ vicitravaitānairmahārhairhematoraṇaiḥ|| 19

अर्थ

उसकी हीरेकी दीवारोंमें बढ़िया लाल जड़े हुए थे, जो ऐसे जान पड़ते थे मानो विमानकी आँखें हों तथा उसे रंग-बिरंगे चँदोवे और बहुमूल्य सुनहरी बन्दनवारोंसे सजाया गया था॥ १९॥

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