श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.22.23

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

शतरूपा महाराज्ञी पारिब३र्हान्महाधनान्।

दम्पत्योः पर्यदात्प्रीत्या भूषावासः परिच्छदान्॥ २३

śatarūpā mahārājñī pāribarhānmahādhanān|

dampatyoḥ paryadātprītyā bhūṣāvāsaḥ paricchadān|| 23

अर्थ

महारानी शतरूपाने भी बेटी और दामादको बड़े प्रेमपूर्वक बहुत से बहुमूल्य वस्त्र, आभूषण और गृहस्थोचित पात्रादि दहेजमें दिये॥ २३॥✎ 1594

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—पारिहार्यं महाधनम्।

    (मुद्रित पृष्ठ 343)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1594 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: प्रसन्‍नता-पूर्वक → प्रसन्‍नतापूर्वक

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