॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.22.19
अतो भजिष्ये१ समयेन साध्वीं
यावत्तेजो बिभृयादात्मनो मे।
अतो धर्मान् पारमहंस्यमुख्यान्
शुक्लप्रोक्तान् बहु मन्येऽविहिंस्रान्॥ १९
ato bhajiṣye samayena sādhvīṃ
yāvattejo bibhṛyādātmano me|
ato dharmān pāramahaṃsyamukhyān
śuklaproktān bahu manye'vihiṃsrān|| 19
अर्थ
अतः मैं आपकी इस साध्वी कन्याको अवश्य स्वीकार करूँगा, किन्तु एक शर्तके साथ। जबतक इसके संतान न हो जायगी, तबतक मैं गृहस्थ-धर्मानुसार इसके साथ रहूँगा। उसके बाद भगवान्के बताये हुए संन्यासप्रधान हिंसारहित शम-दमादि धर्मोंको ही अधिक महत्त्व दूँगा॥ १९॥
टिप्पणियाँ
- १
प्रा० पा०—वरिष्ये।