श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.49

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

गृहीतार्हणमासीनं संयतं प्रीणयन्मुनिः।

स्मरन् भगवदादेशमित्याह श्लक्ष्णया गिरा॥ ४९

gṛhītārhaṇamāsīnaṃ saṃyataṃ prīṇayanmuniḥ|

smaran bhagavadādeśamityāha ślakṣṇayā girā|| 49

अर्थ

जब मनुजी उनकी पूजा ग्रहण कर स्वस्थ-चित्तसे आसनपर बैठ गये, तब मुनिवर कर्दमने भगवान्‌की आज्ञाका स्मरण कर उन्हें मधुर वाणीसे प्रसन्‍न करते हुए इस प्रकार कहा—॥ ४९॥✎ 302

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #302 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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