॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.21.47
प्रांशुं पद्मपलाशाक्षं जटिलं चीरवाससम्।
उपसंसृत्य मलिनं यथार्हणमसंस्कृतम्॥ ४७
prāṃśuṃ padmapalāśākṣaṃ jaṭilaṃ cīravāsasam|
upasaṃsṛtya malinaṃ yathārhaṇamasaṃskṛtam|| 47
अर्थ
उनका शरीर लम्बा था, नेत्र कमलदलके समान विशाल और मनोहर थे, सिरपर जटाएँ सुशोभित थीं और कमरमें चीर-वस्त्र थे। वे निकटसे देखनेपर बिना सानपर चढ़ी हुई महामूल्य मणिके समान मलिन जान पड़ते थे॥ ४७॥