श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.31

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

कृत्वा दयां च जीवेषु दत्त्वा चाभयमात्मवान्।

मय्यात्मानं सह जगद् द्रक्ष्यस्यात्मनि चापि माम्॥ ३१

kṛtvā dayāṃ ca jīveṣu dattvā cābhayamātmavān|

mayyātmānaṃ saha jagad drakṣyasyātmani cāpi mām|| 31

अर्थ

जीवोंपर दया करते हुए तुम आत्मज्ञान प्राप्त करोगे और फिर सबको अभय-दान दे अपने सहित सम्पूर्ण जगत‍्को मुझमें और मुझको अपनेमें स्थित देखोगे॥ ३१॥

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