श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.25

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

प्रजापतिसुतः सम्राण्मनुर्विख्यातमंगलः।

ब्रह्मावर्तं योऽधिवसन् शास्ति सप्तार्णवां महीम्॥ २५

prajāpatisutaḥ samrāṇmanurvikhyātamaṃgalaḥ|

brahmāvartaṃ yo'dhivasan śāsti saptārṇavāṃ mahīm|| 25

अर्थ

प्रसिद्ध यशस्वी सम्राट् स्वायम्भुव मनु ब्रह्मावर्तमें रहकर सात समुद्रवाली सारी पृथ्वीका शासन करते हैं॥ २५॥✎ 300

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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