॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.21.14
ये मायया ते हतमेधसस्त्वत्-
पादारविन्दं भवसिन्धुपोतम्।
उपासते कामलवाय तेषां
रासीश कामान्निरयेऽपि ये स्युः॥ १४
ye māyayā te hatamedhasastvat-
pādāravindaṃ bhavasindhupotam|
upāsate kāmalavāya teṣāṃ
rāsīśa kāmānniraye'pi ye syuḥ|| 14
अर्थ
आपके चरणकमल भवसागरसे पार जानेके लिये जहाज हैं। जिनकी बुद्धि आपकी मायासे मारी गयी है, वे ही उन तुच्छ क्षणिक विषय-सुखोंके लिये, जो नरकमें भी मिल सकते हैं उन चरणोंका आश्रय लेते हैं; किन्तु स्वामिन्! आप तो उन्हें वे विषय-भोग भी दे देते हैं॥ १४॥