॥ श्रीहरिः ॥
सृष्ट्वा भूतपिशाचांश्च भगवानात्मतन्द्रिणा।
दिग्वाससो मुक्तकेशान् वीक्ष्य चामीलयद् दृशौ॥ ४०
sṛṣṭvā bhūtapiśācāṃśca bhagavānātmatandriṇā|
digvāsaso muktakeśān vīkṣya cāmīlayad dṛśau|| 40
अर्थ
इसके पश्चात् भगवान् ब्रह्माने अपनी तन्द्रासे भूत-पिशाच उत्पन्न किये। उन्हें दिगम्बर (वस्त्रहीन) और बाल बिखेरे देख उन्होंने आँखें मूँद लीं॥ ४०॥
सृष्ट्वा भूतपिशाचांश्च भगवानात्मतन्द्रिणा।
दिग्वाससो मुक्तकेशान् वीक्ष्य चामीलयद् दृशौ॥ ४०
इसके पश्चात् भगवान् ब्रह्माने अपनी तन्द्रासे भूत-पिशाच उत्पन्न किये। उन्हें दिगम्बर (वस्त्रहीन) और बाल बिखेरे देख उन्होंने आँखें मूँद लीं॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 333) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/20/40/