श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.17

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

सोऽनुविष्टो भगवता यः शेते सलिलाशये।

लोकसंस्थां यथापूर्वं निर्ममे संस्थया स्वया॥ १७

so'nuviṣṭo bhagavatā yaḥ śete salilāśaye|

lokasaṃsthāṃ yathāpūrvaṃ nirmame saṃsthayā svayā|| 17

अर्थ

जब ब्रह्माण्डके गर्भरूप जलमें शयन करनेवाले श्रीनारायणदेवने ब्रह्माजीके अन्तःकरणमें प्रवेश किया, तब वे पूर्वकल्पोंमें अपने ही द्वारा निश्चित की हुई नाम-रूपमयी व्यवस्थाके अनुसार लोकोंकी रचना करने लगे॥ १७॥

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