क्या उन्होंने इस जगत्को पत्नियोंके सहयोगसे उत्पन्न किया या अपने-अपने कार्यमें स्वतन्त्र रहकर अथवा सबने एक साथ मिलकर इस जगत्की रचना की?॥ ११॥
सद्वितीयाः किमसृजन् स्वतन्त्रा उत कर्मसु।
आहोस्वित्संहताः सर्व इदं स्म समकल्पयन्॥ ११
क्या उन्होंने इस जगत्को पत्नियोंके सहयोगसे उत्पन्न किया या अपने-अपने कार्यमें स्वतन्त्र रहकर अथवा सबने एक साथ मिलकर इस जगत्की रचना की?॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 330) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/20/11/