फिर कुछ बड़े होनेपर वे सफेद बैल और रंग-बिरंगी शोभाकी मूर्ति गौओंको चराते हुए अपने साथी गोपोंको बाँसुरी बजा-बजाकर रिझाने लगे॥ २९॥✎ 197198199
स एव गोधनं लक्ष्म्या निकेतं सितगोवृषम्।
चारयन्ननुगान् गोपान् रणद्वेणुररीरमत्॥ २९
फिर कुछ बड़े होनेपर वे सफेद बैल और रंग-बिरंगी शोभाकी मूर्ति गौओंको चराते हुए अपने साथी गोपोंको बाँसुरी बजा-बजाकर रिझाने लगे॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.2.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 245) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/2/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)