अपना माया-जाल नष्ट हो जानेपर वह दैत्य फिर भगवान्के पास आया। उसने उन्हें क्रोधसे दबाकर चूर-चूर करनेकी इच्छासे भुजाओंमें भर लिया, किंतु देखा कि वे तो बाहर ही खड़े हैं॥ २४॥✎ 286287
विनष्टासु स्वमायासु भूयश्चाव्रज्य केशवम्।
रुषोपगूहमानोऽमुं ददृशेऽवस्थितं बहिः॥ २४
अपना माया-जाल नष्ट हो जानेपर वह दैत्य फिर भगवान्के पास आया। उसने उन्हें क्रोधसे दबाकर चूर-चूर करनेकी इच्छासे भुजाओंमें भर लिया, किंतु देखा कि वे तो बाहर ही खड़े हैं॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.19.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 327) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/19/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)