इस प्रकार प्रकट हुए उस आसुरी माया-जालका नाश करनेके लिये यज्ञमूर्ति भगवान् वराहने अपना प्रिय सुदर्शनचक्र छोड़ा॥ २२॥✎ 286287
प्रादुष्कृतानां मायानामासुरीणां विनाशयत्।
सुदर्शनास्त्रं भगवान् प्रायुङ्क्त दयितं त्रिपात्॥ २२
इस प्रकार प्रकट हुए उस आसुरी माया-जालका नाश करनेके लिये यज्ञमूर्ति भगवान् वराहने अपना प्रिय सुदर्शनचक्र छोड़ा॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.19.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 326) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/19/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)