तब श्रीहरिने बड़ी भारी गदा लिये अपने पीछे आ रहे हिरण्याक्षसे, जो सोनेके आभूषण और अद्भुत कवच धारण किये था तथा अपने कटुवाक्योंसे उन्हें निरन्तर मर्माहत कर रहा था, अत्यन्त क्रोधपूर्वक हँसते हुए कहा॥ ९॥✎ 274
परानुषक्तं तपनीयोपकल्पं
महागदं काञ्चनचित्रदंशम्।
मर्माण्यभीक्ष्णं प्रतुदन्तं दुरुक्तैः
प्रचण्डमन्युः प्रहसंस्तं बभाषे॥ ९
तब श्रीहरिने बड़ी भारी गदा लिये अपने पीछे आ रहे हिरण्याक्षसे, जो सोनेके आभूषण और अद्भुत कवच धारण किये था तथा अपने कटुवाक्योंसे उन्हें निरन्तर मर्माहत कर रहा था, अत्यन्त क्रोधपूर्वक हँसते हुए कहा॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.18.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 322) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/18/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)