गाँवोंमें गीदड़ और उल्लुओंके भयानक शब्दके साथ ही सियारियाँ मुखसे दहकती हुई आग उगलकर बड़ा अमंगल शब्द करने लगीं॥ ९॥
अन्तर्ग्रामेषु मुखतो वमन्त्यो वह्निमुल्बणम्।
सृगालोलूकटङ्कारैः प्रणेदुरशिवं शिवाः॥ ९
गाँवोंमें गीदड़ और उल्लुओंके भयानक शब्दके साथ ही सियारियाँ मुखसे दहकती हुई आग उगलकर बड़ा अमंगल शब्द करने लगीं॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.17.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 318) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/17/9/