ऐसे ही और भी अनेकों भयंकर उत्पात देखकर सनकादिके सिवा और सब जीव भयभीत हो गये तथा उन उत्पातोंका मर्म न जाननेके कारण उन्होंने यही समझा कि अब संसारका प्रलय होनेवाला है॥ १५॥
दृष्ट्वान्यांश्च महोत्पातानतत्तत्त्वविदः प्रजाः।
ब्रह्मपुत्रानृते भीता मेनिरे विश्वसम्प्लवम्॥ १५
ऐसे ही और भी अनेकों भयंकर उत्पात देखकर सनकादिके सिवा और सब जीव भयभीत हो गये तथा उन उत्पातोंका मर्म न जाननेके कारण उन्होंने यही समझा कि अब संसारका प्रलय होनेवाला है॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.17.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 318) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/17/15/