श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.17.13

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

गावोऽत्रसन्‍नसृग्दोहास्तोयदाः पूयवर्षिणः।

व्यरुदन्देवलिङ्गानि द्रुमाः पेतुर्विनानिलम्॥ १३

gāvo'trasannasṛgdohāstoyadāḥ pūyavarṣiṇaḥ|

vyarudandevaliṅgāni drumāḥ peturvinānilam|| 13

अर्थ

गौएँ ऐसी डर गयीं कि दुहनेपर उनके थनोंसे खून निकलने लगा, बादल पीबकी वर्षा करने लगे, देवमूर्तियोंकी आँखोंसे आँसू बहने लगे और आँधीके बिना ही वृक्ष उखड़-उखड़कर गिरने लगे॥ १३॥

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