श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.16.19

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

तरन्ति ह्यञ्जसा मृत्युं निवृत्ता यदनुग्रहात्।

योगिनः स भवान् किंस्विदनुगृह्येत यत्परैः॥ १९

taranti hyañjasā mṛtyuṃ nivṛttā yadanugrahāt|

yoginaḥ sa bhavān kiṃsvidanugṛhyeta yatparaiḥ|| 19

अर्थ

आपकी कृपासे निवृत्तिपरायण योगीजन सहजमें ही मृत्युरूप संसारसागरसे पार हो जाते हैं; फिर भला, दूसरा कोई आपपर क्या कृपा कर सकता है॥ १९॥

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