श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.15.13

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

त एकदा भगवतो वैकुण्ठस्यामलात्मनः।

ययुर्वैकुण्ठनिलयं सर्वलोकनमस्कृतम्॥ १३

ta ekadā bhagavato vaikuṇṭhasyāmalātmanaḥ|

yayurvaikuṇṭhanilayaṃ sarvalokanamaskṛtam|| 13

अर्थ

एक बार वे भगवान् विष्णुके शुद्ध-सत्त्वमय सब लोकोंके शिरोभागमें स्थित, वैकुण्ठधाममें जा पहुँचे॥ १३॥

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