श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.42

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

न ब्रह्मदण्डदग्धस्य न भूतभयदस्य च।

नारकाश्चानुगृह्णन्ति यां यां योनिमसौ गतः॥ ४२

na brahmadaṇḍadagdhasya na bhūtabhayadasya ca|

nārakāścānugṛhṇanti yāṃ yāṃ yonimasau gataḥ|| 42

अर्थ

जो जीव ब्राह्मणोंके शापसे दग्ध अथवा प्राणियोंको भय देनेवाला होता है, वह किसी भी योनिमें जाय—उसपर नारकी जीव भी दया नहीं करते॥ ४२॥

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