पूज्यपाद! हम आपको नमस्कार करते हैं। आप हमसे हो सकने योग्य किसी ऐसे कार्यके लिये हमें आज्ञा दीजिये, जिससे इस लोकमें हमारी सर्वत्र कीर्ति हो और परलोकमें सद्गति प्राप्त हो सके’॥ ८॥
तद्विधेहि नमस्तुभ्यं कर्मस्वीड्यात्मशक्तिषु।
यत्कृत्वेह यशो विष्वगमुत्र च भवेद्गतिः॥ ८
पूज्यपाद! हम आपको नमस्कार करते हैं। आप हमसे हो सकने योग्य किसी ऐसे कार्यके लिये हमें आज्ञा दीजिये, जिससे इस लोकमें हमारी सर्वत्र कीर्ति हो और परलोकमें सद्गति प्राप्त हो सके’॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.13.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 293) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/13/8/