॥ श्रीहरिः ॥
यदा स्वभार्यया साकं जातः स्वायम्भुवो मनुः।
प्राञ्जलिः प्रणतश्चेदं वेदगर्भमभाषत॥ ६
yadā svabhāryayā sākaṃ jātaḥ svāyambhuvo manuḥ|
prāñjaliḥ praṇataścedaṃ vedagarbhamabhāṣata|| 6
अर्थ
श्रीमैत्रेयजी बोले—जब अपनी भार्या शतरूपाके साथ स्वायम्भुव मनुका जन्म हुआ, तब उन्होंने बड़ी नम्रतासे हाथ जोड़कर श्रीब्रह्माजीसे कहा—॥ ६॥
यदा स्वभार्यया साकं जातः स्वायम्भुवो मनुः।
प्राञ्जलिः प्रणतश्चेदं वेदगर्भमभाषत॥ ६
श्रीमैत्रेयजी बोले—जब अपनी भार्या शतरूपाके साथ स्वायम्भुव मनुका जन्म हुआ, तब उन्होंने बड़ी नम्रतासे हाथ जोड़कर श्रीब्रह्माजीसे कहा—॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.13.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 293) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/13/6/