॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.13.39
नमो नमस्तेऽखिलमन्त्रदेवता-
द्रव्याय सर्वक्रतवे क्रियात्मने।
वैराग्यभक्त्यात्मजयानुभावित-
ज्ञानाय विद्यागुरवे नमो नमः॥ ३९
namo namaste'khilamantradevatā-
dravyāya sarvakratave kriyātmane|
vairāgyabhaktyātmajayānubhāvita-
jñānāya vidyāgurave namo namaḥ|| 39
अर्थ
समस्त मन्त्र, देवता, द्रव्य, यज्ञ और कर्म आपके ही स्वरूप हैं; आपको नमस्कार है। वैराग्य, भक्ति और मनकी एकाग्रतासे जिस ज्ञानका अनुभव होता है, वह आपका स्वरूप ही है तथा आप ही सबके विद्यागुरु हैं; आपको पुनः-पुनः प्रणाम है॥ ३९॥