श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.13.36

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

स्रुक्तुण्ड आसीत्स्रुव ईश नासयो-

रिडोदरे चमसाः कर्णरन्ध्रे।

प्राशित्रमास्ये२ ग्रसने ग्रहास्तु ते

यच्चर्वणं ते भगवन्‍नग्‍निहोत्रम्॥ ३६

sruktuṇḍa āsītsruva īśa nāsayo-

riḍodare camasāḥ karṇarandhre|

prāśitramāsye grasane grahāstu te

yaccarvaṇaṃ te bhagavannagnihotram|| 36

अर्थ

ईश! आपकी थूथनी (मुखके अग्रभाग)-में स्रुक् है, नासिका-छिद्रोंमें स्रुवा है, उदरमें इडा (यज्ञीय भक्षणपात्र) है, कानोंमें चमस है, मुखमें प्राशित्र (ब्रह्मभागपात्र) है और कण्ठछिद्रमें ग्रह (सोमपात्र) है। भगवन्! आपका जो चबाना है, वही अग्‍निहोत्र है॥ ३६॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—प्रोशित्र०।

    (मुद्रित पृष्ठ 296)

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