श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.13.19

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

तस्याभिपश्यतः खस्थः क्षणेन किल भारत।

गजमात्रः प्रववृधे तदद्भुतमभून्महत्॥ १९

tasyābhipaśyataḥ khasthaḥ kṣaṇena kila bhārata|

gajamātraḥ pravavṛdhe tadadbhutamabhūnmahat|| 19

अर्थ

भारत! बड़े आश्‍चर्यकी बात तो यही हुई कि आकाशमें खड़ा हुआ वह वराह-शिशु ब्रह्माजीके देखते-ही-देखते बड़ा होकर क्षणभरमें हाथीके बराबर हो गया॥ १९॥✎ 254

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #254 शब्दोंके बीचका स्थान: वराहभगवान् की → वराहभगवान्‌की

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