श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.13.11

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

स त्वमस्यामपत्यानि सदृशान्यात्मनो गुणैः।

उत्पाद्य शास धर्मेण गां यज्ञैः पुरुषं यज॥ ११

sa tvamasyāmapatyāni sadṛśānyātmano guṇaiḥ|

utpādya śāsa dharmeṇa gāṃ yajñaiḥ puruṣaṃ yaja|| 11

अर्थ

तुम अपनी इस भार्यासे अपने ही समान गुणवती सन्तति उत्पन्‍न करके धर्मपूर्वक पृथ्वीका पालन करो और यज्ञोंद्वारा श्रीहरिकी आराधना करो॥ ११॥

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