॥ श्रीहरिः ॥
प्रियव्रतोत्तानपादौ तिस्रः कन्याश्च भारत।
आकूतिर्देवहूतिश्च प्रसूतिरिति सत्तम॥ ५५
priyavratottānapādau tisraḥ kanyāśca bhārata|
ākūtirdevahūtiśca prasūtiriti sattama|| 55
अर्थ
साधुशिरोमणि विदुरजी! उनमें प्रियव्रत और उत्तानपाद दो पुत्र थे तथा आकूति, देवहूति और प्रसूति—तीन कन्याएँ थीं॥ ५५॥
प्रियव्रतोत्तानपादौ तिस्रः कन्याश्च भारत।
आकूतिर्देवहूतिश्च प्रसूतिरिति सत्तम॥ ५५
साधुशिरोमणि विदुरजी! उनमें प्रियव्रत और उत्तानपाद दो पुत्र थे तथा आकूति, देवहूति और प्रसूति—तीन कन्याएँ थीं॥ ५५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.12.55 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 292) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/12/55/