श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.53

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

यस्तु तत्र पुमान् सोऽभून्मनुः स्वायम्भुवः स्वराट्।

स्त्री याऽऽसीच्छतरूपाख्या महिष्यस्य महात्मनः॥ ५३

yastu tatra pumān so'bhūnmanuḥ svāyambhuvaḥ svarāṭ|

strī yā''sīcchatarūpākhyā mahiṣyasya mahātmanaḥ|| 53

अर्थ

उनमें जो पुरुष था वह सार्वभौम सम्राट् स्वायम्भुव मनु हुए और जो स्त्री थी, वह उनकी महारानी शतरूपा हुईं॥ ५३॥

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