इतनेमें ही सातों समुद्र प्रलयकालके प्रचण्ड पवनसे उमड़कर अपनी उछलती हुई उत्ताल तरंगोंसे त्रिलोकीको डुबो देते हैं॥ ३०॥✎ 246247
तावत्त्रिभुवनं सद्यः कल्पान्तैधितसिन्धवः।
प्लावयन्त्युत्कटाटोपचण्डवातेरितोर्मयः॥ ३०
इतनेमें ही सातों समुद्र प्रलयकालके प्रचण्ड पवनसे उमड़कर अपनी उछलती हुई उत्ताल तरंगोंसे त्रिलोकीको डुबो देते हैं॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.11.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 285) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/11/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)