श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.11.27

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तमोमात्रामुपादाय प्रतिसंरुद्धविक्रमः।

कालेनानुगताशेष आस्ते तूष्णीं दिनात्यये॥ २७

tamomātrāmupādāya pratisaṃruddhavikramaḥ|

kālenānugatāśeṣa āste tūṣṇīṃ dinātyaye|| 27

अर्थ

कालक्रमसे जब ब्रह्माजीका दिन बीत जाता है, तब वे तमोगुणके सम्पर्कको स्वीकार कर अपने सृष्टिरचनारूप पौरुषको स्थगित करके निश्चेष्टभावसे स्थित हो जाते हैं॥ २७॥✎ 246 247

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #246 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #247 शब्दोंके बीचका स्थान: २४॥यह → २४॥ यह

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