मैत्रेयजीने कहा—विदुरजी! सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलि—ये चार युग अपनी सन्ध्या और सन्ध्यांशोंके सहित देवताओंके बारह सहस्र वर्षतक रहते हैं, ऐसा बतलाया गया है॥ १८॥✎ 246247
कृतं त्रेता द्वापरं च कलिश्चेति चतुर्युगम्।
दिव्यैर्द्वादशभिर्वर्षैः सावधानं निरूपितम्॥ १८
मैत्रेयजीने कहा—विदुरजी! सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलि—ये चार युग अपनी सन्ध्या और सन्ध्यांशोंके सहित देवताओंके बारह सहस्र वर्षतक रहते हैं, ऐसा बतलाया गया है॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.11.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 284) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/11/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)