pareṣāṃ gatimācakṣva ye syuḥ kalpād bahirvidaḥ|| 16
अर्थ
विदुरजीने कहा—मुनिवर! आपने देवता, पितर और मनुष्योंकी परमायुका वर्णन तो किया। अब जो सनकादि ज्ञानी मुनिजन त्रिलोकीसे बाहर कल्पसे भी अधिक कालतक रहनेवाले हैं, उनकी भी आयुका वर्णन कीजिये॥ १६॥
पितृदेवमनुष्याणामायुः परमिदं स्मृतम्।
परेषां गतिमाचक्ष्व ये स्युः कल्पाद् बहिर्विदः॥ १६
विदुरजीने कहा—मुनिवर! आपने देवता, पितर और मनुष्योंकी परमायुका वर्णन तो किया। अब जो सनकादि ज्ञानी मुनिजन त्रिलोकीसे बाहर कल्पसे भी अधिक कालतक रहनेवाले हैं, उनकी भी आयुका वर्णन कीजिये॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.11.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 284) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/11/16/